
Odisha ओडिशा: तमिलनाडु में एक प्राइवेट सीफूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट यूनिट में हुए अमोनिया गैस लीक हादसे में ओडिशा की एक और प्रवासी महिला वर्कर की मौत हो गई है। इस घटना के बाद अब मरने वाले ओडिया प्रवासी श्रमिकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इस हादसे ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक की पहचान ओडिशा के अंगुल जिले के पल्लाहारा ब्लॉक स्थित अलोरी ग्राम पंचायत के अंधारी साही निवासी बुधुबारी नायक (25) के रूप में हुई है। वह एक आदिवासी विधवा थी और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने के लिए तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिक के रूप में काम कर रही थी।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 21 जून को तिरुवल्लूर जिले के पेरियापलायम के पास कन्निगैपेयर गांव स्थित सीफूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री में हुई थी। उसी दौरान अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया, जिससे फैक्ट्री परिसर में काम कर रहे श्रमिक जहरीले धुएं के संपर्क में आ गए।
उस समय फैक्ट्री में ओडिशा, असम और झारखंड के करीब 120 प्रवासी मजदूर कार्यरत थे। गैस लीक के बाद कई श्रमिकों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और चक्कर आने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं। कुछ श्रमिक फैक्ट्री के अंदर ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद सभी प्रभावित मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कई लोगों का इलाज चल रहा था। बुधुबारी नायक भी उन्हीं में शामिल थी, जो गंभीर रूप से घायल थी और कई दिनों से उपचाराधीन थी। हालांकि, उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः उसकी मौत हो गई।
मृतका के परिजनों के अनुसार, बुधुबारी परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बाहर काम करने गई थी। उसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजन और ग्रामीण इस घटना से गहरे सदमे में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बुधुबारी नायक का पार्थिव शरीर बाद में भुवनेश्वर लाया गया और फिर उसके पैतृक गांव पल्लाहारा पहुंचाया गया। अंतिम प्रक्रिया के दौरान असिस्टेंट लेबर ऑफिसर माइकल जूजो और खमार पुलिस मौजूद रही। करीब रात 1 बजे शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि गैस रिसाव तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण हुआ हो सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, कामकाजी परिस्थितियों और औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूर संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमोनिया गैस अत्यंत जहरीली होती है और इसके रिसाव से सांस संबंधी गंभीर समस्याएं, आंखों को नुकसान और कई मामलों में जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है।
इस हादसे ने न केवल ओडिशा बल्कि अन्य राज्यों के प्रवासी श्रमिक परिवारों में भी चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में मजदूर बेहतर आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, लेकिन कई बार उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर औद्योगिक इकाइयों में पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है या नहीं।





